हिन्दू सिन्धी जिस पंचांग (Calendar) का इस्तेमाल करते हैं उसका नाम है "विक्रम संबत"। इस पंचांग की स्थापना राजा विक्रमादित्य ने की थी। यह पंचांग चाँद की परिक्रमा पर आधारित है और इसका पहला महीना चैत्र कहलाता है। सिन्धी भाषा में चैत्र से बना “चेटी” और चाँद से बना “चंड” और ये बन गया “चेटी-चंड”।
आज का दिन सिर्फ सिन्धी समाज का ही नहीं पर बहुत सी भारतीय संस्कृतियों के लिए नया वर्ष है। सिन्धी समाज के लिए आज का दिन अतिरिक्त महत्वता रखता है क्योंकि आज ही का दिन सिन्धी समाज के इष्ट देवता झूलेलाल का जन्मदिन भी है।
भारत की अन्य संस्कृतियाँ नव वर्ष के इस पहले दिन को अन्य नाम से जानती हैं जैसे दक्षिण भारत में
“युगादि” और पश्चिमी भारत में
गुड़ीपड़वा।
झूलेलाल के जन्म का नाम उडेरोलाल था, उनके नाम से सिंध में सिंधु नदी के नजदीक एक गाँव भी है।
इस गाँव में उडेरोलाल मंदिर है जिसमे हिन्दू और मुस्लिम दोनों धर्मों के लोग झूलेलाल के आराधना के लिए आते हैं। इस मंदिर को मुस्लिम लोग उडेरो लाल की दरगाह के नाम से जानते हैं।
यहाँ पर आने वाले हिन्दू मानते हैं की ये झूलेलाल का मंदिर है जिनका जन्म का नाम उडेरोलाल था और यहाँ पर आने वाले मुस्लिम ये मानते हैं की यह शेख ताहिर की दरगाह का है जिसका जन्म का नाम उडेरोलाल था और जिसने हिन्दू धर्म को छोड़ कर इस्लाम कबूल किया था।
ये विश्व के एक मात्र ऐसी जगह जहां मुस्लिम नमाज़ और हिन्दू आरती एक साथ होती हैं।
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